अमृत वचन

अमृत वचन। RSS AMRIT VACHAN | संघ के कार्यक्रम हेतु अमृत वचन।

अमृत वचन

श्री बालशास्त्री हरदास जी ने कहा ( अमृत वचन ) –

”  क्रांतिकारी आंदोलन चलाते समय , डॉक्टर जी को यह अनुभव आया कि संस्कारित पीढ़ी के निर्माण के बिना कोई भी पुनरुत्थान का प्रयत्न सफल नहीं हो सकेगा। आज हमें राष्ट्र के लिए मरना नहीं दीप  के सामान तिल – तिल जलते हुए जीना होगा। उनके इसी चिंतन ने आगे चलकर ” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ” की स्थापना के रूप में राष्ट्र के अभ्युदय हेतु एक अभिनव कार्य को जन्म दिया।”

 

संत शिरोमणि रविदास नई लिखा है ( अमृत वचन ) –

 

” दीन – दुखी करि सेव मंही लागि रह्यो रविदास।

निसि बासर की सेव सौं प्रभु मिलान की आस। । “

 

अर्थ –

मानव जीव को दीन – दुखियों की सेवा में लगे रहना चाहिए। रात -दिन सच्ची सेवा के कारण ही मानव जीव के मन में प्रभु मिलान की आशा होती है।

 

संत शिरोमणि रविदास ने दीन – दुखियों और साधू – संतों की सेवा के लिए अनथक कार्य किये थे। उन्होंने अनेक भोजन और टहरने की व्यवस्ता की। ऐसा बताते है कि संत जी को अपनी झोपड़ी में ठाकुर जी की मूर्ती के निचे से स्वर्ण मुद्राएं प्रतिदिन प्राप्त होती थी।  यह ईश्वरीय आशी  का परिणाम था।  इनका उपयोग संत – शिरोमणि सेवा कार्यों में करते थे।

स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद ने भी सेवा को सर्वोच्च कार्य बताते हुए शिवभाव से सेवा करने की प्रेरणा दी है। उन्होंने मन्त्र दिया – ” यत्र जीव तत्र शिव ” (जहां जीव है वहां शिव है ) जिसकी सेवा कर रहे है उसे शिव मानते हुए सेवा करना आध्यात्मिक चरम सत्य का आविष्कार है।  इसीलिए उन्होंने दीं -दुखियों के लिए ” दरिद्र नारायण ” शब्द का प्रयोग किया।

 

स्वामी विवेकानद ( अमृत वचन ) –

” लुढ़कते पत्थर में काई नहीं लगती ” वास्तव में वे धन्य है जो शुरू से ही जीवन का लक्ष्य निर्धारित का लेते है। जीवन की संध्या होते – होते उन्हें बड़ा संतोष मिलता है कि उन्होंने निरूद्देश्य जीवन नहीं जिया तथा लक्ष्य खोजने में अपना समय नहीं गवाया। जीवन उस तीर की तरह होना चाहिए जो लक्ष्य पर सीधा लगता है और निशाना व्यर्थ नहीं जाता।”

 

”  महान संघ याने हिन्दुओं की संगठित शक्ति।  हिन्दुओं की संगठित शक्ति इसलिए कि इस देश का भाग्य निर्माता है। वे इसके स्वभाविक स्वामी है।  उनका ही यह देश है और उन पर ही देश का उत्थान और पतन निर्भर है।”

 

 

 महर्षि अरविन्द ने कहा

( अमृत वचन ) –

“जब दरिद्र तुम्हारे साथ हो , तो उनकी सहायता करो। लेकिन अध्ययन करो। और यह प्रयास भी करो कि तुम्हारी सहायता पाने के लिए दरिद्र लोग न बचे रहे।

 

 स्वामी विवेकानंद ने कहा

( अमृत वचन ) –

” जिस उद्देश्य एवं लक्ष्य कार्य में परिणत हो जाओ उसी के लिए प्रयत्न करो। मेरे साहसी महान बच्चों काम में जी जान से लग जाओ अथवा अन्य तुच्छ विषयों के लिए पीछे मत देखो स्वार्थ को बिल्कुल त्याग दो और कार्य करो।”

 

 

 परम पूज्य श्री गुरूजी ने कहा

( अमृत वचन ) –

” छोटी-छोटी बातों को नित्य ध्यान रखें बूंद – बूंद मिलकर ही बड़ा जलाशय बनता है। एक – एक त्रुटि मिलकर ही बड़ी बड़ी गलतियां होती है।  इसलिए शाखाओं में जो शिक्षा मिलती है उसके किसी भी अंश को नगण्य अथवा कम महत्व का नहीं मानना चाहिए।”

 

परम पूज्य डॉ हेडगेवार जी ने कहा

( अमृत वचन ) –

” अपने हिंदू समाज को बलशाली और संगठित करने के लिए ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जन्म लिया है। ”

 

 स्वामी विवेकानंद ने कहा –

” आगामी वर्षों के लिए हमारा एक ही देवता होगा और वह है अपनी ‘मातृभूमि’ | भारत दूसरे देवताओं को अपने मन में लुप्त हो जाने दो हमारा मातृ रूप केवल यही एक देवता है जो जाग रहा है। इसके हर जगह हाथ है , हर जगह पैर है , हर जगह काम है , हर विराट की पूजा ही हमारी मुख्य पूजा है। सबसे पहले जिस देवता की पूजा करेंगे वह है हमारा देशवासी। ”

 

 

 श्री गुरूजी ने कहा –

” संपूर्ण राष्ट्र के प्रति आत्मीयता का भाव केवल शब्दों में रहने से क्या काम नहीं चलेगा। आत्मीयता को प्रत्यक्ष अनुभूति होना आवश्यक है समाज के सुख-दुख यदि हमें छु पाते हैं तो यही मानना चाहिए कि यह अनुभूति का कोई अंश हमें भी प्राप्त हुआ है। ”

 परम पूज्य डॉ हेडगेवार जी ने कहा –

” हिंदू जाति का सुख ही मेरा और मेरे कुटुंब का सुख है। हिंदू जाति पर आने वाली विपत्ति हम सभी के लिए महासंकट है और हिंदू जाति का अपमान हम सभी का अपमान है। ऐसी आत्मीयता की वृत्ति हिंदू समाज के रोम – रोम में व्याप्त होनी चाहिए यही राष्ट्र धर्म का मूल मंत्र है। ”

संघ गीत भी देखें  –

चन्दन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है

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विद्या ददाति विनयम

कलयुग में शक्ति का एक मात्र साधन संघ है। अर्थात जो लोग एकजुट होकर संघ रूप में रहते हैं , संगठित रहते हैं उनमें ही शक्ति है।

साथियों संघ के गीत का यह माला तैयार किया गया है , जो संघ के कार्यक्रम में एकल गीत गण गीत के रूप में गाया जाता है। समय पर आपको इस माला के जरिए गीत शीघ्र अतिशीघ्र मिल जाए ऐसा हमारा प्रयास है। आप की सुविधा को ध्यान में रखकर हमने इसका मोबाइल ऐप भी तैयार किया है जिस पर आप आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।

राम – राज फिर आएगा , घर – घर भगवा छाएगा”

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