चाणक्य के अनमोल वचन। अमृत वचन। चाणक्य के सुविचार

चाणक्य के अनमोल वचन

 

आँख के अंधे को दुनिया नहीं दिखती ,

काम के अंधे को विवेक नहीं दिखता ,

मद के अंधे को अपने से श्रेष्ठ नहीं दिखता ,

और स्वार्थी को कभी – भी दोष नहीं दिखता। ।  – चाणक्य

 

 

 

जिसने अन्यायपूर्वक धन इक्कठा किया है ,

और अकड़ कर सदा सिर को उठाए रखा है ,

ऐसे लोगों से सदा दूर रहो।

ऐसे लोग स्वयं पर भी बोझ होते है ,

इन्हे शांति कहीं नहीं मिलती। ।    -चाणक्य

 

 

 

दुसरो की गलती से सीखो , अपने ऊपर प्रयोग करके

सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी। ।    – चाणक्य

 

 

किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार ( सीधा – साधा )नहीं होना चाहिए

सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते है।    – चाणक्य

 

 

 

अहंकार और अकड़ दोनों ही जीवन के सबसे बड़े दुश्मन है ,

ये न आपको किसी का होने देते और न कोई आपका होता है। ।

 

 

पीठ हमेशा मजबूत रखना चाहिए

शाबाशी और धोखा

दोनों इसी पर मिलता है। ।    – चाणक्य

 

 

नादानो से दोस्ती कीजिये

मुसीबत के वक्त कोई समझदार

साथ नहीं आता। ।

 

 

कभी किसी चीज का घमंड आ जाये तो

शमशान का एक चक्कर लगा लेना

तुम से बेहतरीन व्यक्ति वहां राख बने पड़े हैं। ।

 

 

वक़्त अपका  है , चाहे तो सोना बना लो ,

या फिर सोने में गुज़ार दो ,

दुनिया आपके उदहारण से बदलेगी आपकी राय से नहीं। ।

 

 

 

छोटी – मोटी घटना से हताश मत होइए ,

जो चन्दन घिस जाता है

वो भगवान के मस्तक पर लगाया जाता है।

और जो नहीं घिसता वह जलाने के काम आता है। ।    – चाणक्य

 

 

नियत कितनी भी अच्छी हो ,दुनिया आपको दिखावा से जानती है ,

दिखावा कितना भी अच्छा हो भगवान आपको आपकी नियत से जानता है। ।  – चाणक्य

 

 

सांप के दांत में ,

बिछु के डंक में

मधुमक्खी के सर में और

मनुष्य के मन में , कितना ज़हर भरा है

बता पाना मुश्किल है। ।

 

 

 

अगर कोई व्यक्ति आपसे जलता है तो

ये उसकी बुरी आदत नहीं बल्कि

आपकी काबिलियत है ,

जो उसे ये काम करने पे मज़बूर करती है। ।

 

 

 

संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है ,

संतोष जैसा कोई सुख नहीं है ,

लोभ जैसी कोई बिमारी नहीं है

और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है। ।

 

 

कोई भी सरल स्वभाव उसकी कमजोरी नहीं होती है

संसार में पानी से सरल कुछ भी नहीं है ,

किन्तु उसका बहाव बड़ी चट्टानों

के भी टुकड़े कर देती है। ।

 

 

सफलता की ऊंचाई पर हो तो धीरज रखना

पंछी भी जानते है कि आकाश में बैठने की जगह नहीं होती

 

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