बढे चलो बढे चलो संघ गीत rss | RSS sangh geet badhe chalo

बढे चलो बढे चलो संघ गीत

 

बढे चलो बढे चलो संघ गीत

 

बढे चलो बढे चलो 

न हाथ एक अस्त्र हो  , 

न साथ एक शस्त्र  हो , 

न अन्न नीर वस्त्र हो ,

हटो नहीं डटो वहीं बढे चलो बढे चलो। ।

 

रहे सक्षम हिमशिखर ,

तुम्हारा पग उठे निखर ,

भले ही जाय तन बिखर ,

रुको नहीं नहीं बढे चलो बढे चलो। । 

 

घटा घिरी अटूट हो 

अधर में कालकूट हो 

वही अमृत का घूंट हो 

जिए चलो मरे चलो बढे चलो बढे चलो। ।

 

गगन उगलता आग हो 

छिड़ा मरण का राग हो 

लहू का अपना फाग हो

अड़ो वहीं गड़ो वहीं बढे चलो बढे चलो। ।

 

चलो नयी मिसाल हो 

चलो यही मशाल हो 

बढ़ो नया कमाल हो 

रुको नहीं झुको नहीं बढे चलो बढे चलो। । 

 

प्रस्तुत गीत संघ में गया जाने वाला गीत है।  आपकी रूचि को ध्यान में रखकर यह गीत त्यारा किया जा रहा है।  आप इस अवसर का लाभ उठाये  .किसी प्रकार का सुझाव मार्गदर्शन आप दे सकते हैं  इसके लिए निचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते है।

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” राम – राज फिर आएगा , घर – घर भगवा छाएगा”

भगवा अग्नि का प्रतीक है। जिस प्रकार अग्नि सारी बुराइयों को जलाकर स्वाहा कर देती है , उसी प्रकार भगवा भी सारी बुराइयों को समाज से दूर करने का प्रयत्न कर रहा है। संपूर्ण भारत भगवामय हो ऐसा संघ का सपना है। यहाँ हमारा भगवा से आशय बुराई मुक्त समाज से है।

इस भगवा ध्वज को ‘ श्री रामचंद्र ‘ ने राम – राज्य में ‘ हिंदूकुश ‘ पर्वत पर फहराया था , जो हिंदू साम्राज्य के वर्चस्व का परिचायक है।  इसी भगवा ध्वज को ‘ वीर शिवाजी ‘ ने मुगल व आताताईयों को भगाने के लिए थामा था। वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भी साँस छोड़ दिया , किंतु भगवा ध्वज को नहीं छोड़ा।

इस भगवा प्लेटफार्म से हम हिंदू अथवा हिंदुस्तान के लोगों से एक सभ्य व शिक्षित समाज की कल्पना करते हैं। जिस प्रकार से राम – राज्य में शांति और सौहार्द का वातावरण था , वैसे ही राज्य की कल्पना हम इस समाज से करते हैं।

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