भरतीय संस्कृति का महत्व | पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण न करें |हिन्दू सनातन धर्म

भारतीय संस्कृति बनाम पाश्चात्य संस्कृति

 

भारतीय संस्कृति एक पुरातन संस्कृति है। इस की पहचान हिंदू और हिंदुस्तान से ही है , किंतु कुछ समय से हिंदू व हिंदुस्तान के लोग पाश्चात्य सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे हैं जिसके कारण हिंदू संस्कृति या यूं कहें कि इस का निरंतर विघटन हो रहा है। क्षण – प्रतिक्षण इसकी अपनी गरिमा को खोती जा रही है इसका एक मात्र कारण स्वयं हिंदू ही है। जिनसे भारतीय संस्कृति की पहचान है। आज भारतीय लोग पाश्चात्य संस्कृति को निरंतर अपना रहे हैं।

 

व भारतीय सभ्यता को छोड़ते जा रहे हैं। एक जमाने में भारत को ‘ सोने की चिड़िया ‘ कहा जाता था। आज वह सोने की चिड़िया कहीं लुप्त हो गई है। भारतीय लोग ‘ संचार ‘ का निरंतर दुरुपयोग कर रहे हैं पाश्चात्य संस्कृति में जहां हिंदू संस्कृति का मिलन हो रहा है या यूं कहें कि पाश्चात्य लोग भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। वह साड़ी , धोती – कुर्ता आदि जैसे भारतीय वस्त्रों को पहन रहे हैं , प्रोत्साहित कर रहे हैं।

 

वही भारतीय लोग उनके द्वारा त्यागे गए वस्त्र , प्रसाधन आदि को अपना रहे हैं और वह भी बिना किसी कारण यह भारत का दुर्भाग्य ही है। जहां ‘ राम ‘ , ‘ कृष्ण ‘ जैसे महापुरुष का जन्म हुआ हो आज उस संस्कृति का यह हाल ! यह बड़ा दुखदाई है।

 

 

भारतीय लोग आज पाश्चात्य त्योहारों को कितने ही उत्साह से मना रहे हैं – ‘ क्रिसमस ‘ , ‘ न्यू ईयर ‘ , ‘ रोज डे ‘ , ‘ प्रपोज डे ‘ , ‘ मदर डे ‘ , ‘ फादर डे ‘ । वही नित्य-निरंतर अपने त्यौहार से किनारा करते जा रहे हैं। जबकि यह त्यौहार किसी खास महत्व से हमारे पूर्वजों ने बनाया था।

आज उसको भूलते जा रहे हैं उसके विषय में हम किसी भी भारतीय से पूछे तो वह नहीं बता पाएंगे कि उसको मनाने का क्या कारण है , और क्यों मनाते हैं। वही क्रिश्मस पर ‘ पर अपने बच्चों को सांता की ड्रेस पहनाते हैं और बड़ा गर्व महसूस करते हैं और बच्चे के ऊपर पाश्चात्य सभ्यता को लाद देते हैं।

आपको यदि मेरी उपरोक्त बात अच्छी लगी है तो अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं वह उन्हें मार्गदर्शन करें कि अपने संस्कृति की रक्षा करें ” जय मां भारती “

 

राम – राज फिर आएगा , घर – घर भगवा छाएगा”

भगवा अग्नि का प्रतीक है। जिस प्रकार अग्नि सारी बुराइयों को जलाकर स्वाहा कर देती है , उसी प्रकार भगवा भी सारी बुराइयों को समाज से दूर करने का प्रयत्न कर रहा है। संपूर्ण भारत भगवामय हो ऐसा संघ का सपना है। यहाँ हमारा भगवा से आशय बुराई मुक्त समाज से है।

इस भगवा प्लेटफार्म से हम हिंदू अथवा हिंदुस्तान के लोगों से एक सभ्य व शिक्षित समाज की कल्पना करते हैं। जिस प्रकार से राम – राज्य में शांति और सौहार्द का वातावरण था , वैसे ही राज्य की कल्पना हम इस समाज से करते हैं।

 

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