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संघ चेतना बढ़ना अपना काम

 

” संघ चेतना बढ़ना अपना काम 

 

आँधी चाहे तूफान मिले ,
चाहे जितने व्यवधान मिले ,
बढ़ना ही अपना काम है ,
बढ़ना ही अपना काम है |

 

हम नई चेतना की धारा ,
हम अंधियारे में उजियारा ,
हम उस ब्यार के झोंके हैं ,
जो हरले सब का दुःख सारा |

 

बढ़ना है शूल मिले तो क्या ?
पथ में अंगार जले तो क्या ?
जीवन में कहाँ विराम है ?
बढ़ना ही अपना काम है |

 

हम अनुयायी उन पाँवों के ,
आदर्श लिए जो खड़े रहे ,
बाधाएँ जिन्हे डिगा न सकी ,
जो संघर्ष पर अड़े रहे |

 

आँधी चाहे तूफान मिले ,
चाहे जितने व्यवधान मिले ,
बढ़ना ही अपना काम है ,
बढ़ना ही अपना काम है |

 

“संघ चेतना बढ़ना अपना काम”

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