संघ चेतना बढ़ना अपना काम है।rss geet | sangh geet mala | संगठन गीत माला

संघ चेतना बढ़ना अपना काम

 

” संघ चेतना बढ़ना अपना काम 

 

आँधी चाहे तूफान मिले ,
चाहे जितने व्यवधान मिले ,
बढ़ना ही अपना काम है ,
बढ़ना ही अपना काम है |

 

हम नई चेतना की धारा ,
हम अंधियारे में उजियारा ,
हम उस ब्यार के झोंके हैं ,
जो हरले सब का दुःख सारा |

 

बढ़ना है शूल मिले तो क्या ?
पथ में अंगार जले तो क्या ?
जीवन में कहाँ विराम है ?
बढ़ना ही अपना काम है |

 

हम अनुयायी उन पाँवों के ,
आदर्श लिए जो खड़े रहे ,
बाधाएँ जिन्हे डिगा न सकी ,
जो संघर्ष पर अड़े रहे |

 

आँधी चाहे तूफान मिले ,
चाहे जितने व्यवधान मिले ,
बढ़ना ही अपना काम है ,
बढ़ना ही अपना काम है |

 

“संघ चेतना बढ़ना अपना काम”

यह भी पढ़ें – हेडगेवार का जीवन परिचय 

इस भगवा प्लेटफार्म से हम हिंदू अथवा हिंदुस्तान के लोगों से एक सभ्य व शिक्षित समाज की कल्पना करते हैं। जिस प्रकार से राम – राज्य में शांति और सौहार्द का वातावरण था , वैसे ही राज्य की कल्पना हम इस समाज से करते हैं।

यह भी पढ़ें – क़ुतुब मीनार और लौह स्तम्भ का हिन्दू से सम्बन्ध 

आपसे अनुरोध है कि अपने विचार कमेंट बॉक्स में सम्प्रेषित करें। 

फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से अपने सुभेक्षु तक भेजें। 

अपना फेसबुक लाइक तथा यूट्यूब पर सब्स्क्राइब करना न भूलें। 

facebook  page

Leave a Comment

error: Content is protected !!