हिन्दू हिन्दू हम बन्धु बन्धु।एकल गीत hindu hindu hum bandhu bandhu | ekal geet

हिन्दू – हिन्दू हम बन्धु – बन्धु

ekal geet एकल गीत

 

गीत – हिन्दू – हिन्दू हम बन्धु – बन्धु हैं  ,

 

हिन्दू – हिन्दू हम बन्धु – बन्धु हैं  , बिंदु – बिंदु हम महासिंधु हैं।

हम अक्षयवट तरु विशाल हैं  , सत्य सनातन चीर त्रिकाल है।

वैष्णव , शैव , शाक्त , सिख शाखा , बौद्ध , जैन हम विविध प्रशाखा।

हम अनेक में एक हिंदू हैं।

हिन्दू – हिन्दू हम बन्धु – बन्धु हैं , बिंदु – बिंदु हम महासिंधु हैं।। 

हम न अवर्ण , सवर्ण कभी हैं , नहीं वैश्य ब्राह्मण क्षत्रिय हैं।

हम न शूद्र हरिजन बनवासी , हम केवल हिंदू अविनाशी।

हम विराट मानव स्वयंभू हैं।

हिन्दू – हिन्दू हम बन्धु – बन्धु हैं , बिंदु – बिंदु हम महासिंधु हैं।। 

यहां ना कोई द्रविड़ आर्य है , कोई न आदिम नहीं अनार्य है।

ऊंच-नीच हम नहीं जानते , अगला पिछड़ा नहीं मानते।

हम समग्र निर्दोष इन्दु हैं।

हिन्दू – हिन्दू हम बन्धु – बन्धु हैं , बिंदु – बिंदु हम महासिंधु हैं।। 

 

 

 

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भगवा अग्नि का प्रतीक है। जिस प्रकार अग्नि सारी बुराइयों को जलाकर स्वाहा कर देती है , उसी प्रकार भगवा भी सारी बुराइयों को समाज से दूर करने का प्रयत्न कर रहा है। संपूर्ण भारत भगवामय हो ऐसा संघ का सपना है। यहाँ हमारा भगवा से आशय बुराई मुक्त समाज से है।
इस भगवा ध्वज को ‘ श्री रामचंद्र ‘ ने राम – राज्य में ‘ हिंदूकुश ‘ पर्वत पर फहराया था , जो हिंदू साम्राज्य के वर्चस्व का परिचायक है।  इसी भगवा ध्वज को ‘ वीर शिवाजी ‘ ने मुगल व आताताईयों को भगाने के लिए थामा था। वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भी साँस छोड़ दिया , किंतु भगवा ध्वज को नहीं छोड़ा।
इस भगवा प्लेटफार्म से हम हिंदू अथवा हिंदुस्तान के लोगों से एक सभ्य व शिक्षित समाज की कल्पना करते हैं। जिस प्रकार से राम – राज्य में शांति और सौहार्द का वातावरण था , वैसे ही राज्य की कल्पना हम इस समाज से करते हैं।

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