suvichar hedgewar rss | हेडगेवार जी का सुविचार। संघ सुविचार

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हेडगेवार जी का सुविचार।

संघ सुविचार

 

हेडगेवार का सुविचार –

 

” जैसे हमारे विचार वैसा ही हमारा आचरण बनता है
अतीत काल में हम बहुत बलवान थे ,
परंतु इस सत्य को आज हम भूल गए हैं
इसलिए आज के हमारे सारे आंदोलन
दुर्बलतापूर्ण दिखाई देते हैं।
हमारे आज के आंदोलनों में
ना चैतन्य है और ना पुरुषार्थ ही है। । ”

संघ सुविचार , हेडगेवार जी के सुविचार

” भारतवर्ष , भारतखंड , आर्यव्रत , हिंदुस्तान
आदि नामों के द्वारा एक ही अर्थ प्रकट होता है
परंतु उस अर्थ की कल्पना मात्र से हम
अकारण हड़बड़ में आ जाते हैं।
बंधन में जकड़े हुए तोते जैसे हमारी अवस्था हो रही है
हम भ्रम के भंवर में फंसकर गोते खा रहे हैं
हमारी संस्कृति को नष्ट – भ्रष्ट करने पर
जो लोग तुले हुए हैं उन्हें गले लगाने के लिए
हम मरे जा रहे हैं
यह सारा हमारी मानसिक दुर्बलता का परिणाम है। ।”

 

” हमारी सारी अवनति की जड़ है , हमारी मानसिक दुर्बलता।
इस दुर्बलता को हम सर्वप्रथम नष्ट करें। । ”

केशवराव बलिराव हेडगेवार। संक्षेप जीवन परिचय।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ।

 

” जीवो जीवस्य जीवनम यह प्रकृति का नियम है।
अर्थात दुर्बल लोग सदैव बलवानों का भक्ष्य बनते हैं।
संसार दुर्बलों के लिए गौरव से जीना असंभव है ,
उन्हें तो बलवानों का दास बनकर ही रहना पड़ता है।
सदैव अपमानित तथा असहनीय कष्टों से परिपूर्ण
जीवन ही उनके भाग्य में लिखा रहता है। । ”

 

चन्दन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है।

स्वयं अब जागकर हमको जगाना देश है अपना

 

” शतक बीत गए हम पर विदेशी आक्रमणों का
तांता लगातार क्यों लगा हुआ है ?
हम दिन दुर्बल तथा मातृप्राय हो गए हैं इसलिए ना ?
हमारी सब विपत्तियों की जड़ में हमारी शक्तिहीनता ही है
उसे हमें सर्वप्रथम उखाड़ फेंकना होगा। । ”

” जब तक हम दुर्बल रहेंगे तब तक हम पर
आक्रमण करने के लिए बलवानों
का मन अवश्य ही ललावत रहेगा
यह तो निसर्ग नियम ही है ,
केवल बलवानों को गालियां देने से
अथवा उनकी निंदा करने से क्या लाभ होगा
ऐसा करने मात्र से परिस्थितियां बदल नहीं सकती। ।

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