RSS GEET ( संघ गीत )

मन मस्त फकीरी धारी है।Man mast fakiri dhari hai ful rss geet with lyrics

मन मस्त फकीरी धारी है , अब एक ही धुन जय-जय भारत।

Man mast fakiri dhari hai rss geet with lyrics

 

मन मस्त फकीरी धारी है।

अब एक ही धुन जय-जय भारत। । २

 

हम धन्य है इस जग जननी की सेवा का अवसर है पाया।२

इसकी माटी , वायु , जल से दुर्लभ जीवन है विकसाया।

यह पुष्प इसी के चरणों में २

मां प्राणों से भी प्यारी है।

 

मन मस्त फकीरी धारी है , मन मस्त फकीरी धारी है ,

मन मस्त फकीरी धारी है , अब एक ही धुन जय जय भारत।

सुंदर सपने नव आकर्षण सब छोड़ चले मुख मोड़ चले। २

वैभव महलों का क्या करना , सोते सुख से आकाश तले।

साधन की और न ताकेंगे , २

कांटो की राह हमारी है।

 

 

मन मस्त फकीरी धारी है , मन मस्त फकीरी धारी है ,

मन मस्त फकीरी धारी है , अब एक ही धुन जय – जय भारत।

ऋषियों , मुनियों , संतों का तप अनमोल हमारी थाती है।२

बलिदानी वीरों की….. गाथा अपने रग – रग लहराती है।

गौरवमय नव इतिहास रचें २

भारत की शक्ति अपारी है।

 

मन मस्त फकीरी धारी है , मन मस्त फकीरी धारी है ,

मन मस्त फकीरी धारी है , अब एक ही धुन जय – जय भारत।

इस समय चुनौती भीषण है , हर देशद्रोह सीना ताने। २

पथभ्रष्ट नीतियां चलती है , आतंकी घूमे मनमाने।

जन जन में सत्व जगायेंगे २

अब अपनी ही तो बारी है।

 

मन मस्त फकीरी धारी है , अब एक ही धुन जय – जय भारत ,

मन मस्त फकीरी धारी है , अब एक ही धुन जय – जय भारत ,

अब एक ही धुन जय – जय भारत , अब एक ही धुन जय – जय भारत।

अब एक ही धुन जय – जय भारत।।।।।।।।।।।।।।।

 

चन्दन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है।

स्वयं अब जागकर हमको जगाना देश है अपना

बढ़ना ही अपना काम है | आरएसएस गीत 

मातृभूमि गान से गूंजता रहे गगन। गणगीत rss

संघ चेतना बढ़ना अपना काम है।rss geet | 

भारत माता तेरा आँचल। संघ गीत

 

भगवा अग्नि का प्रतीक है। जिस प्रकार अग्नि सारी बुराइयों को जलाकर स्वाहा कर देती है , उसी प्रकार भगवा भी सारी बुराइयों को समाज से दूर करने का प्रयत्न कर रहा है। संपूर्ण भारत भगवामय हो ऐसा संघ का सपना है। यहाँ हमारा भगवा से आशय बुराई मुक्त समाज से है।

इस भगवा ध्वज को ‘ श्री रामचंद्र ‘ ने राम – राज्य में ‘ हिंदूकुश ‘ पर्वत पर फहराया था , जो हिंदू साम्राज्य के वर्चस्व का परिचायक है।  इसी भगवा ध्वज को ‘ वीर शिवाजी ‘ ने मुगल व आताताईयों को भगाने के लिए थामा था। वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भी साँस छोड़ दिया , किंतु भगवा ध्वज को नहीं छोड़ा।

इस भगवा प्लेटफार्म से हम हिंदू अथवा हिंदुस्तान के लोगों से एक सभ्य व शिक्षित समाज की कल्पना करते हैं। जिस प्रकार से राम – राज्य में शांति और सौहार्द का वातावरण था , वैसे ही राज्य की कल्पना हम इस समाज से करते हैं।

एक स्वयंसेवक में यह गुण की कल्पना की जाती है –

” पैर में चक्कर , मुंह में शक्कर ,

दिल में आग , शीश पर फाग। ।

अर्थात विश्राम नहीं करना , सदैव लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करना।

कोई कितना ही कड़वा बोले धैर्य रखकर मुस्कुराते रहना।

दिल में लक्ष्य की प्राप्ति की आग धधकती रहे और शीश पर भगवा रंग रहे जो बुराइयों का सदैव नाश करती रहे। ।

 

विद्या ददाति विनयम

कलयुग में शक्ति का एक मात्र साधन संघ है। अर्थात जो लोग एकजुट होकर संघ रूप में रहते हैं , संगठित रहते हैं उनमें ही शक्ति है।

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